बिखरो तो मोतियों की तरह, फैलो तो आसमान बन जाओ
टुकड़े-टुकड़े जीने की हसरत वालों. जुड़ो तो मुकम्मल जहान बन जाओ
सुनो जमाने की ठोकरों के पत्थर, सिमटों तो पूरा मकान बन जाओ
हौले- हौले बदलकर क्या हो गए हो , अब बदलो तो इन्सान बन जाओ
बरसो तो सावन की तरह, धुलो तो लबों की जुबान बन जाओ
बस उम्र गुजरी, न चूके न हारे हो , जाओ कुछ ऐसा करो कि महान बन जाओ....
टुकड़े-टुकड़े जीने की हसरत वालों. जुड़ो तो मुकम्मल जहान बन जाओ
सुनो जमाने की ठोकरों के पत्थर, सिमटों तो पूरा मकान बन जाओ
हौले- हौले बदलकर क्या हो गए हो , अब बदलो तो इन्सान बन जाओ
बरसो तो सावन की तरह, धुलो तो लबों की जुबान बन जाओ
बस उम्र गुजरी, न चूके न हारे हो , जाओ कुछ ऐसा करो कि महान बन जाओ....