Friday, 13 January 2012

उस वक्त भी


जब मन नाप न पाये मीलों की इस दूरी को
उस वक्त भी हृदय में मेरे पास हो तुम।
जब तुम देख रहे मुझको तारों में छिपकर
उस वक्त भी सशरीर मेरे साथ हो तुम।
जब भोर में आओगे ओस की बूँदे बनकर
उस वक्त भी मेरे लिए चाँदनी रात हो तुम।
जब जग बौराये जेठ की तपती दुपहरी में

उस वक्त भी


जब मन नाप न पाये मीलों की इस दूरी को
उस वक्त भी हृदय में मेरे पास हो तुम।
जब तुम देख रहे मुझको तारों में छिपकर
उस वक्त भी सशरीर मेरे साथ हो तुम।