काले धन पर मीडिया, राजनीतिज्ञ और देश की आम जनता सभी बवाल मचा रहे हैं, लेकिन मीडिया और जनता के अलावा जो तीसरा पक्ष है वो नहीं चाहता कि उनकी काली कमाई देश में वापस आए। कांग्रेस सरकार शोर तो मचा रही है कि स्विस बैंकों में जमा देश का पैसा वापस लाया जाएगा लेकिन इस दिशा मे कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है। अगर कुछ दिख रहा है तो इसे वापस लाने की मुहिम में जुटे लोगों पर सरकार की दमनात्मक जिद। बाबा रामदेव के आंदोलन को दबाना हो या अन्ना पर सरकार के सिपहसालारों की जुबानी जमाखर्च हर तरफ एक स्याह परत दिख रही है। कांग्रेस सरकार न तो देश में व्याप्त भ्रष्टाचार मिटाने की पहल का साथ दे रही है और न देश के बाहर गए पैसे को वापस लाने में कोई दिलचस्पी दिखा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भ्रष्टाचार और काले धन के पीछे सरकार का मौन समर्थन है? क्या सरकार अपने दामन के दागदार होने के डर से कोई ठोस हल निकालने से हिचकिचा रही है? या फिर सरकार ( मनमोहन सिंह) इतनी निर्बल है कि वो इस मुद्दे पर कुछ कर हीं नहीं पा रही है?
वजह चाहे जो भी हो कांग्रेस की सरकार हर मुद्दे पर फेल साबित हो रही है और जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है। बात एक अन्ना और रामदेव की नहीं है बल्कि उन्हे मिले दूर दराज के लोगों का समर्थन है जो सरकार के खिलाफ गुस्से की कुलबुलाहट से शुरू हुई है और इसे भड़कते देर नहीं लगेगी।
No comments:
Post a Comment