सरकार की सहमति के बाद ये समझना कि जनलोकपाल बिल से देश की दशा और दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा निहायत ही जनता को लॉलीपाप देकर बहलाना होगा। अगर जनलोकपाल बिल संसद में पास भी हो जाता है तो किसी को सजा होगी ऐसा सोचना मुमकिन नहीं है। अगर भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने के लिए सिस्टम सजग होता तो मौजूदा कानून उसके लिए पर्याप्त है। अलग से कोई कानून की जरूरत नहीं। सूचना के अधिकार का हश्र लोग देख ही रहे हैं। कहीं जानकारी मांगने वालों को झूठे केस में फंसा दिया जाता है तो कहीं उनकी हत्या कर दी जाती है। लेकिन कहते हैं- नाउम्मीदी के बीच एक उम्मीद का सूरज जलता तो होगा,
बस वो तपती हुई नजर चाहिए।।
No comments:
Post a Comment