Tuesday, 6 August 2013

अधूरे ख्वाब

मेरी कहानी 'अधूरे ख्वाब' का एक अंश...
तुम नहीं समझोगे माधव, बहुत तकलीफ होती है जब तुम हवाओं से बातें करते हो, बहुत दर्द होता है जब तुम्हे आसमान की बुलंदियों पर देखती हूँ, देखती हूँ कि तुम्हारे आस-पास ढ़ेर सारे लोगों का जमघट लगा है और तुम खुश होकर अपनी कामयाबी का जश्न मना रहे हो। तुम कहोगे कि मैं कैसी पत्नी हूँ जो तुम्हे खुश देखकर खुश नहीं होती। पर क्या करुँ माधव मैं चाहती हूँ कि तुम्हे सारी खुशियाँ मिले लेकिन मेरे बगैर नहीं। मुझे ये कभी मंजूर नहीं कि मेरे बिना अपने जीवन का एक पल भी तुम जियो। मुझे तुम्हारे बिना साँस भी लेना मंजूर नहीं और तुम मुकम्मल जिन्दगी जिये जा रहे हो।
माफ करना, ये कहने का भी हक तो नहीं दिया है तुमने, शायद मुझे कभी पत्नी माना ही नहीं लेकिन क्या करूँ समाज ने और खुद मैंने भी तुम पर ये अनचाहा रिश्ता थोप दिया है और यही वजह है कि मैं तुम्हारी खुशियों में कहीं शामिल नहीं हो पाती। लेकिन अगर तुम कामयाब नहीं होते, तुम्हारे पास पैसे नहीं होते तो शायद तुम मुझे यूँ अधूरे न मिलते। हाँ.. तुम हमेशा अधूरे रहते हो मेरे पास, संपूर्णता में कभी देखा ही नहीं। जब बातें करते हो तो तुम्हारी नजरें मेरे चेहरे को नहीं देखती तुम कहीं दूसरी तरफ देखते रहते हो। कई बार मन होता है कि तुम्हे जबर्दस्ती अपनी तरफ देखने को कहूँ और फिर पुछूँ कि क्यों नही देख पाते तुम मुझे। जब तुम मुझे छूते हो तो लगता है कि किसी बेजान बुत को छू रहे हो और उस वक्त... उफ्फ... तुम्हे पता नहीं पर कई ऐसी छोटी-छोटी बातें होती हैं जो तुम्हारे लिये मायने नहीं रखती पर मेरा तो वजूद हिला देती हैं माधव...। एक पल के लिए भी कभी तुमने सोचा है कि मुझे किस बात की सजा दे रहे हो। क्या तुम्हे प्यार करना गलत था, क्या तुम्हे पागलपन की हद तक हासिल करने का जुनून गलत था और अगर ऐसा था तो एक बार सिर्फ एक बार मुझे बोल देते कि कामिनी मेरे सपने में तुम कभी नहीं आती... मेरी आनेवाली जिन्दगी के कैनवास पर तुम्हारे नाम का कोई रंग नहीं है... मैं तो तुम्हारे मौन को स्वीकृति समझ बैठी। क्या प्रेम को परिणति देने का मेरा फैसला गलत था माधव.......
सोनी किशोर सिंह

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