सोनी किशोर सिंह
“हिन्दुत्व” को राष्ट्रवाद की संजीवनी
पिलाकर बीजेपी सत्ता में आई थी। भाजपा ने सत्ता उस कांग्रेस से छिनी थी जिसने देश
को पूरी तरह गर्त में तो डुबोया ही, साथ ही हिन्दुत्व को एक दोयम दर्जे का शब्द बनाकर
रख दिया। देशद्रोही वामियों तथा पाकिस्तानपरस्त मुल्लों को कांग्रेस ने रेवड़ियां बांटी
और वंदे मातरम, राष्ट्रगान, हिन्दुत्व को गौरवहीन कर दिया। बीजेपी ने लोगों के
दिलों में बसे इसी राष्ट्रवाद, देशप्रेम को उभारा और सत्ता अपने हाथ में ले ली। गाय,
गंगा, गौरी से होते हुए “भारत माता की जय” का उदघोष देश में गूंजने लगा। हिन्दुत्व गौरवान्वित हो उठा।
लेकिन इतना काफी नहीं है। सत्ता में आने के बाद पूरे किए जाने वाले वादे
बीजेपी भूल गई। न धारा 370 हटी न राम मंदिर बना। और तो और उरी के बाद पुलवामा की
घटना हुई लेकिन पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक के अलावा कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो
पाई। छुहारे के ट्रकों को सीमा पार रोकने, मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीनने,
अंतर्राष्ट्रीय सहानुभूति जुटाने से कुछ नहीं होता। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आने
वाला।
जवानों की शहादत का बदला क्या मोदी सरकार ऐसे बेबी स्टेप्स से लेगी ? अगर हाँ, तो 56 इंची सीने और पप्पुगीरी
में क्या फर्क रह जाएगा ? वक्त है कुछ बड़ा
करने की। गद्दार पड़ोसी को सबक सिखाने की, अपने वादों (कोई एक ही सही) को पूरा
करने की। देश के बाहर से ज्यादा दुश्मन घर
के अंदर छिपे हैं जो मौका ढूँढ़ रहे हैं सत्ता वापसी की। मोदी जी ऐसे दीमकों को
मौके मत दीजिए। अभी के दौर में, आपसे बेहतर प्रधानमंत्री कोई नहीं हो सकता। आपसे जनता
का मोहभंग हो, इसके लिए राजकुमार अपनी
राजकुमारी बहना को भी मैदान में उतार चुका है। संभलिए और सत्ता में वापसी कीजिए।
तमाम नाराजगियों के बाद भी कमल और मोदी ही देश के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
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