Thursday, 22 March 2018

बिहार दिवस


सोनी किशोर सिंह
जहाँ पल उसेन बोल्ट की तरह पलक झपकते भाग रहा है, तो दिन पी. टी. ऊषा बन नज़रों से ओझल होती जा रही है। दौड़ती-भागती ज़िन्दगी में बहुत कुछ पीछे छूट गया जैसे... लेकिन जो संजो कर रखा है वो तेरी सोंधी सी महक है। मुंबई की तेज रफ्तार में भी दिल गंवई अनगढ़ माटी जैसा रह गया और मन का देसीपना ट्रैफिक जाम की तरह हमारे अंदर ही थम गया है।
यहां हम अपनी यादें ही नहीं अपने हिस्से का बिहार लेकर जीते हैं। वो बिहार जो बागों में बहार है से अलग है, वो बिहार जो मनसे की नफरत से अछूता है। ये वो बिहार है, जो हर बिहारी अपने अन्दाज़ में, अपनी बोली में, अपने पहनावे में, अपने देशप्रेम में बचाकर रखता है।
आप सबको और सबसे ज्यादा ख़ुद को बिहार दिवस की शुभकामनाएं !!!

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