चन्द्रमुखी
तकरीबन महीने दो महीने पर उससे बात हो ही जाती थी। हर बार उसका नया अंदाज
होता, उसके बात करने का, हँसने का, बोलने का, रूठने का लेकिन वो बेचारा क्या करे
उसके मनाने का तरीका एक सा ही होता। उसके घिसे-पिटे डायलॉग सुनकर लड़की और नाराज
हो जाती और कहती- ‘तू कभी तो कुछ नया बोलना सीख ले, सालों से तोते की तरह सॉरी बोलना ही सीखा
है.... कहीं का।‘ वह मायूस होकर फोन रख देता। दो चार दिन तक उसकी हिम्मत नहीं होती कि वो फोन
करे और लड़की की डांट सुने पर पाँचवे दिन से उसका मन कुलबुलाने लगता। वह सोचता
लड़की अच्छी है एक बार हाल-चाल ले ही लेता हूँ, पता नहीं कैसी होगी... नाराज भी
होती है तो मेरी बेवकूफी की वजह से ही... ऐसे तो ठीक ही बोलती है.... उससे क्या
ईगो रखना.... वह तरह-तरह की बात सोच कर खुद को दिलासा देता और महीने-डेढ़ महीने
बाद लड़की की घुड़कियां सुनने के लिये मानसिक रूप से तैयार हो जाता।
यह सिलसिला सालों से चलता आ रहा था। वह फोन करता, लड़की डांटती, गुस्से में
फोन पटक देती, वह मायूस होता, मन ही मन खुद को कोसता लेकिन फिर खुद ही मानकर
दुबारा से फोन कर लेता। वह अपनी पूरी जाँच-पड़ताल करता... क्या कमी है मुझमें
दिखने में अच्छा खासा हूँ, अच्छा कमाता हूँ.. कई लड़कियाँ मरती हैं मुझ पर... फिर ये लड़की इतना
भाव क्यों खाती है.... खैर कुछ भी हो मैं भी हिम्मत नहीं हारूँगा, देखता हूँ मेरी
स्मार्ट पर्सनालिटी से कब तक इम्प्रेस नहीं होती... उसे बस मेरे बात करने का तरीका
अच्छा नहीं लगता तो मैं तरीका बदल देता हूँ,,, ऐसे-ऐसे डायलॉग बोलूँगा कि उसकी
बोलती बंद हो जायेगी। वह कई दिनों तक इसी उधेड़बुन में पड़ा रहा कि अबकी बार ऐसी
क्या बात करे कि लड़की उस पर फिदा हो जाये। सोच-विचार कर उसे एक टॉप का आइडिया आता
है... दो तीन बार स्टाइल से वह डायलॉग की प्रैक्टिस करता है। अपने परफेक्शन का
अंदाजा होते ही वह हँस पड़ता है। इस बार पूरे दो महीने बाद उसने फोन किया – ‘हैलो... कैसी हो चन्द्रमुखी ?’ उधर से आवाज आयी- ‘व्हाट नॉनसेन्स... चन्द्रमुखी
होगी तुम्हारी बहन.....।’ वह नॉनस्टॉप शुरू हो गई। वह हड़बड़ा गया- ‘सॉरी मैं तो मजाक कर रहा
था।‘ लेकिन लड़की मजाक
के मूड में नहीं थी- ‘ऐसा है मेरे पास मजाक करने की फुर्सत है नहीं,,, ये पुराने जमाने का मजाक
तू अपने जमाने की किसी लड़की से कर....उसे ये चन्द्रमुखी और सूर्यमुखी का राग
सुना... अपना अमोल पालेकर स्टाइल दिखा कर मुझे इम्प्रेस मत कर...’ लड़की फुलस्पीड में बोलकर
रख देती है। वह बेचारा पिछले पाँच-छह सालों का हिसाब-किताब लगाने बैठता है- फोन
बिल्स के बारे में सोचकर तसल्ली होती है कि चलो ज्यादा बिल बर्बाद नहीं हुआ, लेकिन
जब वक्त का हिसाब लगाने बैठता है तो उसे रोना आ जाता है.... उफ्फ ! कई साल बर्बाद हो गये इस घमंडी लड़की के चक्कर
में अगर पाँच-छह साल पहले किसी के पीछे यूँ पड़ता तो अब तक मेरी वो वाली
चन्द्रमुखी मेरे बच्चों की अम्मा बन चुकी होती।
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